इस अदा से वो वफ़ा करते हैं

हुस्न का हक़ नहीं रहता बाक़ी हर अदा में वो अदा करते हैं ...

Daag 600x350.jpg

दाग़ देहलवी

इस अदा से वो वफ़ा करते हैं
कोई जाने कि वफ़ा करते हैं

हमको छोड़ोगे तो पछताओगे
हँसने वालों से हँसा करते हैं

ये बताता नहीं कोई मुझको
दिल जो आ जाए तो क्या करते हैं

हुस्न का हक़ नहीं रहता बाक़ी
हर अदा में वो अदा करते हैं

किस क़दर हैं तेरी आँखे बेबाक
इन से फ़ित्ने भी हया करते हैं

इस लिए दिल को लगा रक्खा है
इस में दिल को लगा रक्खा है

'दाग़' तू देख तो क्या होता है
जब्र पर जब्र किया करते हैं

DISCUSSION

blog comments powered by Disqus

सबसे लोकप्रिय

poet-image

खेलूँगी कभी न होली

खेलूँगी कभी न होली उससे जो नहीं...

poet-image

सब बुझे दीपक जला लूं

सब बुझे दीपक जला लूं घिर रहा तम...

poet-image

पत्रोत्कंठित जीवन का विष बुझा हुआ है

पत्रोत्कंठित जीवन का विष बुझा हुआ...

poet-image

हो कहाँ अग्निधर्मा नवीन ऋषियों

कहता हूँ¸ ओ मखमल–भोगियों। श्रवण...

poet-image

धूप सा तन दीप सी मैं

धूप सा तन दीप सी मैं!  उड़ रहा...

ad-image